श्रवण सोमवार की कथा


एक छोटे से गाँव में, जहाँ हर कोई एक-दूसरे से जुड़ा हुआ था, वहां हर साल श्रवण सोमवार का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता था। यह दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित था। गाँव के लोग इस दिन उपवास रखते थे और शिवलिंग पर जल चढ़ाते थे। गाँव के सभी लोग इस दिन को लेकर बहुत उत्साहित रहते थे। लेकिन इस बार, गाँव में एक नए व्यक्ति का आगमन हुआ। उसका नाम था राघव। राघव एक साधारण किसान था, लेकिन उसके मन में भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा थी। वह पहली बार श्रवण सोमवार के दिन गाँव आया और उसने वहाँ की भक्ति और श्रद्धा का अनुभव किया। राघव ने सोचा कि वह भी इस दिन भगवान शिव की पूजा करेगा। लेकिन उसके पास पूजा के लिए सामग्री नहीं थी। उसने गाँव के कुछ लोगों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने भी उसकी मदद नहीं की। सभी लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। राघव को ऐसा लगा जैसे उसकी भक्ति को कोई मान नहीं दे रहा है। फिर उसने सोचा, "यदि मैं अपने दिल से भगवान शिव की पूजा करूंगा, तो क्या यह पर्याप्त नहीं होगा?" उसने अपनी सोच को सकारात्मक रखा और जंगल में जाकर एक पवित्र जल स्रोत खोजने का निर्णय लिया। वह जंगल में गया और बहुत खोजने के बाद उसे एक सुंदर झरना मिला। उसने उस जल को अपने बर्तन में भरा और गाँव लौट आया। गाँव में श्रवण सोमवार की पूजा का समय शुरू हो चुका था। राघव ने झरने का जल शिवलिंग पर चढ़ाने का निश्चय किया। जब वह पूजा करने लगा, तो गाँव के लोग उसे देख रहे थे। कुछ लोग हंस रहे थे और कुछ उसकी उपेक्षा कर रहे थे। लेकिन राघव ने किसी की परवाह नहीं की। उसने पूरे मन से भगवान शिव की आराधना की। जब राघव ने जल चढ़ाया, तो अचानक आसमान में बादल घेर आए। गाँव के लोग हैरान रह गए। कुछ ही समय में मूसलधार बारिश शुरू हो गई। बारिश की बूंदों ने सबको भिगो दिया, लेकिन राघव की पूजा का जल शिवलिंग पर चढ़ता रहा। सब लोग आश्चर्यचकित थे। फिर एक दिव्य प्रकाश शिवलिंग से निकला और गाँव के चारों ओर फैल गया। गाँव के लोग समझ गए कि राघव की भक्ति ने भगवान शिव को प्रसन्न कर दिया। उन्होंने राघव की भक्ति को स्वीकार किया। सबने एक साथ मिलकर राघव की पूजा की और भगवान शिव का आभार प्रकट किया। उस दिन के बाद से, गाँव के लोग राघव को सम्मान देने लगे। उन्होंने सीखा कि भक्ति और विश्वास की कोई सीमा नहीं होती। श्रवण सोमवार केवल एक दिन नहीं, बल्कि भक्ति का एक उदाहरण बन गया। राघव ने साबित कर दिया कि सच्चे दिल से की गई पूजा हमेशा फलित होती है। और इस प्रकार, श्रवण सोमवार की यह कहानी गाँव में एक परंपरा बन गई, जहाँ हर साल लोग राघव की भक्ति की याद में एकत्र होते थे।