AartiGyan | 07 January 2026
द्वारका, जिसे भगवान कृष्ण का निवास माना जाता है, एक प्राचीन और रहस्यमय शहर है। इसकी नींव समुद्र के गर्भ में छिपी हुई है और अनेक कहानियाँ इसके चारों ओर फैली हुई हैं। यह कहानी आर्यन नाम के एक युवा लड़के की है, जो द्वारका के रहस्यों को जानने के लिए उत्सुक था।
आर्यन एक छोटे से गाँव में रहता था, जहाँ उसके दादा-दादी से सुनाई गई कहानियाँ उसे हमेशा आकर्षित करती थीं। उन्होंने उसे बताया था कि द्वारका एक समय पर भगवान कृष्ण का शहर था, जहाँ असंख्य अद्भुत घटनाएँ घटित होती थीं। आर्यन ने ठान लिया कि वह द्वारका की यात्रा करेगा और वहाँ की अनकही कहानियों का पता लगाएगा।
एक सुबह, आर्यन ने अपनी यात्रा शुरू की। उसने अपने गाँव से चुपके से निकलकर द्वारका की ओर बढ़ना शुरू किया। रास्ते में उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसकी जिज्ञासा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। अंततः, वह द्वारका पहुँचा।
द्वारका में पहुँचकर आर्यन की आँखें खुली रह गईं। यहाँ की सुंदरता अद्भुत थी। समुद्र की लहरें जैसे द्वारका के गहनों को चूम रही थीं। उसने आसपास की गलियों में घूमना शुरू किया और वहाँ के लोगों से बातें की। उन्होंने उसे बताया कि द्वारका में हर जगह भगवान कृष्ण की छवि बसी हुई है।
एक दिन, आर्यन को एक प्राचीन मंदिर में जाने का मौका मिला। वहाँ एक साधु बाबा बैठे थे। आर्यन ने उनसे पूछा, "बाबा, क्या आप मुझे द्वारका की अनकही कहानियाँ सुनाएंगे?" साधु ने मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, द्वारका की कहानियाँ तो बेमिसाल हैं, लेकिन उन्हें सुनने के लिए तुम्हें पहले अपने दिल की गहराई में उतरना होगा।"
आर्यन ने ध्यान से साधु की बात सुनी और अपने मन में एक निर्णय लिया। उसने साधु से कहा, "मैं द्वारका के अद्भुत रहस्यों को जानने के लिए तैयार हूँ।" साधु ने उसे एक छोटे से पत्थर का टुकड़ा दिया और कहा, "इस पत्थर को अपने पास रखो, जब तुम सही समय पर इसे देखोगे, तब तुम्हें द्वारका की सच्चाई का पता चलेगा।"
आर्यन ने वह पत्थर अपने पास रख लिया और अपनी यात्रा जारी रखी। उसने द्वारका के विभिन्न स्थलों का भ्रमण किया, वहाँ के लोगों से मिली कहानियाँ सुनीं, और समुद्र के किनारे बैठकर भगवान कृष्ण से अपनी जिज्ञासा का समाधान मांगा।
एक शाम, जब सूरज समुद्र में डूब रहा था, आर्यन ने वह पत्थर बाहर निकाला। अचानक, उसके चारों ओर एक हल्की रोशनी फैल गई और वह एक अद्भुत दृश्य देखने लगा। उसे हर तरफ भगवान कृष्ण के अद्भुत लीला के दृश्य दिखने लगे। आर्यन की आँखों में आँसू भर आए। उसने समझा कि द्वारका सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक भावना है। यह भक्ति, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।
आर्यन ने वहाँ की कहानियों को अपने दिल में समेट लिया और यह तय किया कि वह इन्हें अपने गाँव में लौटकर सबको सुनाएगा। द्वारका ने उसे एक नया दृष्टिकोण दिया था और यह यात्रा उसे हमेशा याद रहेगी।
इस तरह, द्वारका की रहस्यमयी कहानियाँ आर्यन के दिल में बस गईं, और उसने सच्ची भक्ति के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।