AartiGyan | 05 January 2026
प्राचीन भारत के एक छोटे से गाँव में, जहाँ हरियाली और शांति का साम्राज्य था, वहाँ एक विद्वान् नामक पंडित रहते थे। उनका ज्ञान इतना गहरा था कि लोग उन्हें विष्णु पुराण का जीवित संस्करण मानते थे। एक दिन, गाँव में एक बड़ा मेला आयोजित हुआ। गाँव के लोग उत्सव में भाग लेने के लिए बेसब्री से तैयार हो रहे थे।
मेले में, पंडित जी ने अपने ज्ञान के माध्यम से विष्णु पुराण की महिमा का बखान करने का निर्णय लिया। उन्होंने गाँव के बच्चों को बुलाया और उन्हें बैठाकर कहा, "बच्चों, आज मैं तुम्हे विष्णु पुराण की एक अद्भुत कथा सुनाने जा रहा हूँ।"
सभी बच्चे उत्सुकता से सुनने लगे। पंडित जी ने कहा, "एक समय की बात है, जब ब्रह्मा और शिवजी के साथ भगवान विष्णु ने सृष्टि के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक की। उन तीनों ने मिलकर संसार को रचने का निश्चय किया। ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया, शिवजी ने उसे संहार किया और भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की।"
बच्चों ने ध्यान से सुना और पंडित जी ने आगे कहा, "भगवान विष्णु ने अनेक अवतार लिए हैं, जैसे कि राम और कृष्ण। हर बार जब धर्म की हानि होती है, तब वे धरती पर अवतार लेते हैं।"
पंडित जी ने एक विशेष घटना का वर्णन करना शुरू किया। उन्होंने बताया, "जब दुष्ट राक्षस हिरण्यकश्यप ने धरती पर आतंक मचाया, तब भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया। वे आधे मानव और आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए। उस समय भगवान ने हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रह्लाद को बचाया।"
बच्चों ने यह सुनकर उत्साह से चिल्लाया, "वाह! भगवान विष्णु कितने महान हैं!"
पंडित जी ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, बच्चों। भगवान विष्णु सदा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। जब प्रह्लाद ने अपने पिता से भगवान विष्णु की भक्ति की, तब भगवान ने उसकी रक्षा की। इसी प्रकार, विष्णु पुराण हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और धर्म की राह पर चलने से हमें हमेशा मदद मिलती है।"
कथा सुनाकर, पंडित जी ने सभी बच्चों को शांति और प्रेम का संदेश दिया। उन्होंने कहा, "जो लोग सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलते हैं, भगवान विष्णु उनकी रक्षा करते हैं।"
बच्चों ने पंडित जी से वादा किया कि वे हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलेंगे और भगवान विष्णु की भक्ति करेंगे। मेले में उत्सव का माहौल था और सभी लोग भगवान विष्णु की महिमा का गुणगान कर रहे थे।
इस प्रकार, विष्णु पुराण की कथा ने न केवल बच्चों के दिलों में भगवान के प्रति श्रद्धा जगाई, बल्कि गाँव के हर व्यक्ति को यह सिखाया कि सच्चाई और धर्म का पालन करने से ही जीवन में सच्ची खुशी और शांति प्राप्त होती है।
और इस तरह, पंडित जी की कथा ने गाँव के लोगों को एकत्र किया और सबने मिलकर भगवान विष्णु की भक्ति में एक नई ऊर्जा के साथ जीवन जीने का संकल्प लिया।