मकर संक्रांति भारत के सबसे महत्वपूर्ण और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि प्रकृति, भूगोल और विज्ञान का एक अद्भुत संगम है। जब सर्दियों की ठिठुरन कम होने लगती है और सूरज अपनी नई यात्रा शुरू करता है, तब पूरा देश "हैप्पी मकर संक्रांति" के नारों और रंग-बिरंगी पतंगों से गूंज उठता है।
मकर संक्रांति 2026 में कब है? (When to Celebrate)
ज्योतिष शास्त्र और सौर कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी। इसी दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है।
क्यों और किसलिए मनाते हैं मकर संक्रांति? (Reason to Celebrate)
मकर संक्रांति मनाने के पीछे कई आध्यात्मिक और सामाजिक कारण हैं:
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उत्तरायण की शुरुआत: इस दिन से सूर्य उत्तर की ओर गमन करने लगता है, जिसे 'उत्तरायण' कहा जाता है। हिंदू धर्म में उत्तरायण को देवताओं का दिन और अत्यंत शुभ माना गया है।
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फसल का त्योहार: यह किसानों के लिए खुशी का समय होता है क्योंकि रबी की फसलें पकने लगती हैं। इसे नई फसल के स्वागत के रूप में मनाया जाता है।
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अंधकार से प्रकाश की ओर: यह पर्व संदेश देता है कि अब रातें छोटी और दिन बड़े होने लगेंगे, यानी प्रकाश की विजय होगी।
मकर संक्रांति का वैज्ञानिक कारण (Scientific Reason)
मकर संक्रांति के पीछे गहरे वैज्ञानिक तर्क छिपे हैं:
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विटामिन D का स्रोत: इस दिन लोग घंटों छतों पर पतंग उड़ाते हैं। सर्दियों के बाद सूरज की सीधी किरणें शरीर को विटामिन D देती हैं और त्वचा की बीमारियों को दूर करने में मदद करती हैं।
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तिल और गुड़ का महत्व: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तिल और गुड़ दोनों ही शरीर को अंदरूनी गर्मी प्रदान करते हैं। यह संक्रमण से लड़ने की शक्ति (Immunity) बढ़ाते हैं और शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित करते हैं।
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पृथ्वी का झुकाव: खगोल विज्ञान के अनुसार, इस दिन पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) की तरफ सूर्य का झुकाव बढ़ जाता है, जिससे ठंड कम होने लगती है।
कैसे मनाया जाता है यह त्योहार? (How We Celebrate)
भारत के हर कोने में इसे अलग तरीके से मनाया जाता है:
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पवित्र स्नान: लोग गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।
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दान-पुण्य: इस दिन खिचड़ी, तिल, गुड़ और ऊनी कपड़ों का दान करना महापुण्य माना जाता है।
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भोजन: मुख्य रूप से बाजरे की खिचड़ी, तिल के लड्डू और घेवर जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं।
राजस्थान में मकर संक्रांति का रंग (How Rajasthan Celebrates)
राजस्थान में मकर संक्रांति का नजारा दुनिया भर में मशहूर है, खासकर जयपुर और जोधपुर में।
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पतंगबाजी का जुनून: राजस्थान के आसमान में इस दिन सूरज भी नहीं दिखता क्योंकि आसमान लाखों रंगीन पतंगों से भर जाता है। "वो काटा!" की गूंज हर गली में सुनाई देती है।
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सांस्कृतिक खेल: कई जगहों पर गिल्ली-डंडा और सतोलिया जैसे पारंपरिक खेल खेले जाते हैं।
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दान की परंपरा: राजस्थान में गायों को हरा चारा खिलाने और सुहागिन महिलाओं द्वारा 14 वस्तुओं को दान करने (तेरुंडा) की विशेष परंपरा है।
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आतिशबाजी और लालटेन: शाम होते ही आसमान में लालटेन (Kandils) छोड़े जाते हैं, जिससे पूरा शहर जगमगा उठता है।
मकर संक्रांति और सूर्य देव की उपासना के लिए शास्त्रों में बहुत ही सुंदर और प्रभावशाली श्लोक दिए गए हैं।
1. सूर्य के राशि परिवर्तन का श्लोक (संक्रांति महत्व)
यह श्लोक सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और अंधकार से प्रकाश की ओर जाने को दर्शाता है:
"रवि संक्रान्ति काले तु स्नानं दानं च अक्षयम्। सर्वपापहरा नित्यं सर्वपुण्यप्रदायिनी॥"
अर्थ: सूर्य की संक्रांति के समय किया गया स्नान और दान 'अक्षय' (कभी न समाप्त होने वाला) होता है। यह सभी पापों को हरने वाला और अनंत पुण्य प्रदान करने वाला है।
2. सूर्य देव की स्तुति (आरोग्य और प्रकाश के लिए)
चूंकि इस दिन हम सूर्य की पूजा करते हैं, यह श्लोक सबसे लोकप्रिय है:
"ॐ सूर्य देवं नमस्तेस्तु गृहाणं करुणाकरम्। अर्घ्यं च फलं संयुक्तं गन्ध माल्याक्षतै युतम्॥"
अर्थ: हे करुणा करने वाले सूर्य देव, आपको नमस्कार है। कृपया गंध, माला और अक्षत से युक्त इस अर्घ्य को स्वीकार करें।
3. गायत्री मंत्र (सूर्य उपासना का महामंत्र)
मकर संक्रांति पर सूर्य की नई ऊर्जा प्राप्त करने के लिए गायत्री मंत्र का जाप सबसे श्रेष्ठ माना जाता है:
"ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥"
अर्थ: उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।
"शास्त्रों में कहा गया है— रवि संक्रान्ति काले तु स्नानं दानं च अक्षयम्। अर्थात इस दिन किया गया दान और पवित्र नदी में स्नान व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति कराता है।"







