विष्णु पुराण की अमर कथा: सृष्टि के निर्माण से लेकर भगवान विष्णु के अद्भुत अवतारों का रहस्य


प्राचीन काल में जब केवल शून्यता और अंधकार का वास था, तब भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना का संकल्प लिया। विष्णु पुराण की कथाओं के अनुसार, यह संसार ईश्वर की लीला और उनके विभिन्न रूपों का संगम है।

ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि का सृजन

सृष्टि के आरंभ में जब ब्रह्मा जी ने अपनी आँखें खोलीं, तो चारों ओर केवल जल व्याप्त था। भगवान विष्णु के निर्देशानुसार, ब्रह्मा जी ने तप की शक्ति से पृथ्वी, आकाश, पर्वत, नदियों और समस्त जीव-जंतुओं का निर्माण किया।

जब संकट में पड़ी सृष्टि: भगवान के अवतार

सृष्टि के संचालन के दौरान जब-जब अधर्म बढ़ा, भगवान विष्णु ने विभिन्न अवतार धारण किए:

  • मत्स्य अवतार: प्रलय के समय राजा मनु और समस्त जीवों की रक्षा की।

  • कूर्म अवतार: समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को सहारा दिया ताकि अमृत की प्राप्ति हो सके।

  • नरसिंह अवतार: अपने अनन्य भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए हिरण्यकश्यप का वध किया।

निष्कर्ष

विष्णु पुराण हमें सिखाता है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि धर्म का पालन करना है। यह ग्रंथ हमें सजग रहने और ईश्वर के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। जब भी अंधकार बढ़ता है, विश्वास रखिए कि प्रकाश (ईश्वर) किसी न किसी रूप में अवश्य प्रकट होता है।