नंदी और ग्रहदोष: एकता और साहस की एक पौराणिक गाथा


एक समय की बात है, देवों के देव महादेव शिव कैलाश पर्वत पर निवास करते थे। उनका एक प्रिय साथी था - नंदी, जो एक विशाल और शक्तिशाली बैल था। नंदी न केवल शिव का वफादार साथी था, बल्कि वह उनके सभी देवताओं और भक्तों के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक था। एक दिन, जब नंदी शिव की सेवा में व्यस्त था, तभी उसे एक अजीब आवाज सुनाई दी। यह आवाज पर्वत के दूसरी ओर से आ रही थी। उसकी जिज्ञासा बढ़ गई, और उसने शिव से अनुमति मांगी। शिव ने मुस्कुराते हुए कहा, "जाओ, मेरे प्रिय नंदी, और देखो क्या हो रहा है।"

 

नंदी ने अपनी ताकतवर टांगों को मोड़ते हुए पर्वत के दूसरी ओर की ओर दौड़ना शुरू किया। वहां उसने देखा कि एक विशाल राक्षस, जिसका नाम 'ग्रहदोष' था, एक गांव पर आतंक फैला रहा था। लोग डर के मारे भाग रहे थे, और राक्षस हंस रहा था। नंदी का दिल धड़क उठा। उसने सोचा, "अगर मैं इसे रोक नहीं पाया, तो यह गांव तबाह हो जाएगा।" नंदी ने अपनी ताकत जुटाई और राक्षस की ओर बढ़ा। "रुक जाओ, ग्रहदोष! तुम इन निर्दोष लोगों को परेशान नहीं कर सकते!" नंदी ने गर्जना की। राक्षस ने हंसते हुए कहा, "तुम एक साधारण बैल हो। तुम मुझसे क्या कर सकते हो?" नंदी ने अपनी भृकुटी चिढ़ाई और कहा, "मैं शिव का सेवक हूं। मेरे पास शक्ति है। मैं तुम्हें हराकर दिखाऊंगा।" राक्षस ने अपनी विशालता का अहंकार दिखाते हुए नंदी पर हमला किया। नंदी ने अपने सारे बल को इकट्ठा किया और एक जबरदस्त धक्का दिया। राक्षस को उसकी ताकत का अंदाजा नहीं था। नंदी ने उसे एक जोरदार धक्का दिया, और वह राक्षस चौंक गया। नंदी ने फिर से जोर लगाया और राक्षस को पीछे धकेल दिया। गांव वाले यह सब देख रहे थे। उन्होंने नंदी के साहस को देखकर हिम्मत जुटाई और राक्षस के खिलाफ एकजुट होने लगे। वे नंदी की सहायता करने लगे।

 

नंदी ने गांव वालों को संबोधित किया, "डरो मत! हम सब मिलकर इस राक्षस को पराजित कर सकते हैं।" गांव वालों ने नंदी की बातों पर विश्वास किया और उसकी ओर बढ़े। सबने मिलकर राक्षस की ओर हमला किया। नंदी और गांव वालों की एकजुटता ने राक्षस को अपने पैर पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया। अंततः, नंदी ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर राक्षस को पराजित कर दिया। गांव वाले खुशी से झूम उठे। उन्होंने नंदी का धन्यवाद किया और उसे अपने गांव का नायक मान लिया। नंदी ने मुस्कुराते हुए कहा, "यह मेरी शक्ति नहीं, बल्कि हमारी एकता की ताकत थी।" जब नंदी कैलाश पर्वत लौटे, शिव ने उन्हें गले लगाया और कहा, "तुमने न केवल अपनी शक्ति साबित की, बल्कि तुमने हमें यह भी सिखाया कि एकता में ही शक्ति है।"

 

इस प्रकार, नंदी ने अपनी साहसिक यात्रा से न केवल राक्षस को हराया, बल्कि गांव वालों के दिलों में भी एक नई उम्मीद जगाई। वह हमेशा शिव का वफादार साथी बना रहा, और उसकी कहानी सदियों तक लोगों के बीच गूंजती रही।