कजरी तीज का जादू


कजरी तीज का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व हर साल सावन की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए उपवास रखती हैं। इस पर्व के साथ जुड़ी एक पुरानी प्रेम कहानी है, जो हर साल इस दिन को खास बनाती है। कजरी तीज की सुबह, गाँव की सभी महिलाएँ अपने घरों से निकलकर तालाब के किनारे इकट्ठा होती हैं। वहाँ चटक रंग-बिरंगे कपड़े पहने, हंसते-खिलखिलाते वे अपनी सहेलियों के साथ गीत गाते हुए कजरी तीज का स्वागत करती हैं। इस दिन की खासियत होती है कजरी गाने, जो प्रेम और मिलन की भावना को दर्शाते हैं।

 

गाँव की एक सुंदर लड़की, सुमित्रा, जो अपने पति को बहुत प्यार करती थी, वह इस पर्व को लेकर बेहद उत्साहित थी। सुमित्रा ने अपने पति के लिए खास रूप से तैयार होने का मन बनाया। उसने अपनी माँ से सुनी हुई कजरी गाने की धुनें याद कीं और अपने दिल की गहराइयों से गाने के लिए तैयार हुई। सुमित्रा का पति, राजू, गाँव के एक दूरदराज के इलाके में काम करता था। वह हमेशा अपने काम में व्यस्त रहता था, लेकिन सुमित्रा जानती थी कि इस खास दिन पर वह जरुर लौटेगा। उसने अपने मन में उम्मीद बंधाई कि राजू उसकी प्रतीक्षा कर रहा होगा। सुमित्रा ने पूरे मन से उपवास रखा और शाम होते ही तालाब के किनारे अपने सहेलियों के साथ गई। जब सुमित्रा अपने सहेलियों के साथ तीज के गीत गा रही थी, तभी उसे राजू की आवाज सुनाई दी। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। राजू वहाँ आया और सुमित्रा को देखकर उसकी आँखों में खुशी की चमक आ गई। उसने सुमित्रा को गले लगाया और कहा, "मैंने तुम्हें बहुत याद किया।

 

तुम्हारे बिना यह पर्व अधूरा था।" सुमित्रा ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैंने भी तुम्हारा इंतज़ार किया। आज का दिन हमारे लिए खास है।" राजू ने सुमित्रा के लिए एक सुंदर काजल की डिबिया लाया था। उसने कहा, "यह तुम्हारी आँखों को और भी खूबसूरत बनाएगा।" सभी ने मिलकर तीज के गीत गाए और तालाब के पानी में रंगीन फूल डाल कर अपनी खुशियों का इज़हार किया। इस दिन की खुशियाँ न केवल सुमित्रा और राजू के लिए, बल्कि पूरे गाँव के लिए थीं। सबने मिलकर प्रेम और एकता का जश्न मनाया। कजरी तीज का यह पर्व सिर्फ एक उत्सव नहीं था, बल्कि यह प्रेम, एकता और परंपरा का प्रतीक था। सुमित्रा और राजू की कहानी ने सभी को याद दिलाया कि सच्चा प्यार हर कठिनाई को पार कर सकता है और त्योहारों की खुशियाँ साझा करने से ही दोगुनी होती हैं।

 

इस तरह, कजरी तीज ने न केवल सुमित्रा और राजू के प्यार को मजबूत किया, बल्कि पूरे गाँव में प्रेम और भाईचारे की भावना को भी बढ़ावा दिया।