हनुमान की लंका यात्रा: अटूट भक्ति और अदम्य साहस की एक अद्भुत कहानी


एक समय की बात है, जब अहंकारी रावण ने माता सीता का छल से अपहरण कर लिया था। भगवान राम, जो मर्यादा पुरुषोत्तम और एक महान योद्धा थे, अपने भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की व्याकुलता में खोज कर रहे थे। रावण का साम्राज्य समुद्र पार एक विशाल टापू (लंका) पर था, जहाँ पहुँचना साधारण मनुष्य के लिए असंभव था।

तभी इस महान अभियान में भगवान राम के साथ हनुमान जुड़े। हनुमान, जो वानरराज केसरी और माता अंजनी के पुत्र थे, पवन के समान वेग और अपार शक्ति के स्वामी थे।

1. समुद्र लांघना और लंका में प्रवेश

हनुमान जी ने अपनी अद्भुत शक्तियों को जागृत किया और एक ही छलांग में विशाल समुद्र को पार कर लिया। लंका पहुँचकर उन्होंने बड़ी चतुराई से रावण के महल की जासूसी की। वहाँ उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को दुखी और व्याकुल अवस्था में देखा।

2. हनुमान और माता सीता का हृदयस्पर्शी संवाद

हनुमान जी ने बहुत ही विनम्रता के साथ माता सीता के सामने प्रकट होकर अपना परिचय दिया।

हनुमान जी ने कहा: "हे माता! मैं प्रभु श्री राम का दूत हूँ। वे आपके वियोग में अत्यंत दुखी हैं और शीघ्र ही आपको यहाँ से मुक्त कराने आने वाले हैं।"

जब माता सीता को विश्वास नहीं हुआ, तब हनुमान जी ने उन्हें भगवान राम द्वारा दी गई 'राम-नाम अंकित मुद्रिका' (अंगूठी) भेंट की। मुद्रिका को देखकर माता सीता की आँखों में आँसू आ गए और उन्होंने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए अपना चूड़ामणि संदेश के रूप में श्री राम को देने के लिए सौंपा।

3. लंका दहन और रावण को चुनौती

माता सीता से आज्ञा लेकर हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया। जब रावण के सैनिकों ने उन्हें बंदी बनाकर रावण के दरबार में पेश किया, तो रावण ने उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। हनुमान जी ने अपनी शक्ति से अपनी पूंछ को विशाल कर लिया और पूरी स्वर्ण लंका को आग की लपटों में झोंक दिया। यह रावण के अहंकार पर पहली बड़ी चोट थी।

4. विजय और श्री राम का साथ

हनुमान जी ने वापस लौटकर श्री राम को माता सीता की स्थिति बताई। भगवान राम हनुमान की भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी सेना का मुख्य आधार बनाया। अंततः, राम जी ने अपनी वानर सेना के साथ लंका पर आक्रमण किया, रावण का वध किया और माता सीता को सुरक्षित वापस लाए।


उपदेश (Moral of the Story)

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि "विश्वास में ही असली शक्ति है।" यदि आपका अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण निस्वार्थ है और ईश्वर पर अटूट विश्वास है, तो दुनिया की कोई भी बाधा आपको सफल होने से नहीं रोक सकती।

निष्कर्ष

हनुमान जी की वीरता और भक्ति ने सदियों से करोड़ों लोगों को प्रेरित किया है। आज भी उन्हें 'राम भक्त हनुमान' के नाम से पूजा जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी शक्ति का उपयोग केवल धर्म और सत्य की स्थापना के लिए किया।


हम आपसे जानना चाहते हैं: हनुमान जी का कौन सा गुण—उनका साहस, उनकी बुद्धिमानी या उनकी निस्वार्थ भक्ति