देवी भागवत की महिमा: जब सच्ची भक्ति ने गाँव को सूखे से बचाया


एक समय की बात है, जब एक छोटे से गाँव में श्रीराम नामक एक ब्राह्मण अपने परिवार के साथ रहता था। वह साधु और ज्ञानी तो था ही, लेकिन उसका मन हमेशा देवी भागवत की भक्ति में लीन रहता था। गाँव में लोग उसे देवी भागवत का भक्त मानते थे, क्योंकि वह हमेशा देवी की स्तुति करता और उनके गुणों का गान करता। गाँव में एक बार एक भयंकर सूखा पड़ा। लोग परेशान थे, फसल सूख गई और जल का संकट बढ़ गया। हर कोई देवी से प्रार्थना करने लगा, लेकिन कोई भी सुख-समृद्धि का अनुभव नहीं कर पा रहा था। श्रीराम ने निर्णय लिया कि वह देवी भागवत की विशेष पूजा करेंगे।

 

श्रीराम ने गाँव के सभी लोगों को एकत्र किया और कहा, "हमें देवी भागवत की आराधना करनी चाहिए। यदि हम सच्चे मन से प्रार्थना करेंगे, तो देवी हमारी सहायता जरूर करेंगी।" गाँव वालों ने सहमति जताई और पूजा की तैयारी शुरू कर दी। श्रीराम ने देवी भागवत की कथा सुनाई, जिसमें बताया गया कि कैसे देवी ने कठिन समय में अपने भक्तों की रक्षा की। उन्होंने कहा, "जब हम सच्चे मन से देवी की आराधना करते हैं, तो वह हमारी सभी समस्याओं का समाधान कर देती हैं।" गाँव वालों ने मिलकर एक बड़ा यज्ञ आयोजित किया। उन्होंने फूल, फल, और मीठे पकवान देवी को अर्पित किए। यज्ञ के दौरान, श्रीराम ने देवी भागवत की महिमा का गुणगान किया। सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे और अपनी समस्याओं को भुला कर भक्ति में लीन हो गए। जैसे-जैसे यज्ञ आगे बढ़ा, अचानक आकाश में बादल घेर आए। गाँव वालों ने आश्चर्य से देखा कि बादल धीरे-धीरे बारिश की बूँदें बरसाने लगे।

 

बारिश की पहली बूँद ने ही सबके दिलों में आशा की किरण जगा दी। लोग खुशी से झूम उठे और देवी का जयकारा लगाने लगे। वह बारिश धीरे-धीरे तेज होती गई और गाँव की भूमि हरियाली से भर गई। सब लोग देवी भागवत की कृपा को देखकर आश्चर्यचकित थे। श्रीराम ने कहा, "देखो, देवी ने हमारी प्रार्थना सुनी है। हमें उनकी भक्ति में सच्चे मन से जुटे रहना चाहिए।" इसके बाद, गाँव वाले हर साल देवी भागवत की पूजा करने लगे। हर साल वे एक बड़ा उत्सव मनाते थे जिसमें देवी की कथा सुनाई जाती थी, भजन गाए जाते थे, और सभी मिलकर एक-दूसरे की मदद करते थे। इस तरह से देवी भागवत की महिमा गाँव के हर व्यक्ति के दिल में बस गई। समय बीतता गया, लेकिन गाँव की एकता और भक्ति कभी नहीं भुलाई गई। श्रीराम की भक्ति और देवी भागवत की कृपा से गाँव में सुख-समृद्धि बनी रही।

इस प्रकार देवी भागवत की कथा सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बन गई, जो हर पीढ़ी को भक्ति और एकता का महत्व सिखाती रही।