बसंत पंचमी: ज्ञान, कला और प्रकृति के उत्सव का दिन


भारत त्योहारों का देश है, और यहाँ हर मौसम का अपना एक विशेष महत्व है। बसंत पंचमी (Basant Panchami) ऋतुराज वसंत के आगमन का प्रतीक है। यह दिन न केवल प्रकृति के सौंदर्य का उत्सव है, बल्कि विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना का महापर्व भी है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है, इसकी सही पूजा विधि क्या है और भारत के अलग-अलग कोनों में इसे कैसे मनाया जाता है।

1. बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है? (Significance)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन अपने कमंडल से जल छिड़ककर ज्ञान की देवी सरस्वती को प्रकट किया था। उनके प्रकट होते ही मूक सृष्टि में स्वर और ज्ञान का संचार हुआ। इसीलिए, इस दिन को देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। साथ ही, यह दिन कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति में नई ऊर्जा और हरियाली के स्वागत का प्रतीक है।

2. हम किसकी पूजा करते हैं? (Whom we Worship)

बसंत पंचमी पर मुख्य रूप से देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। वे ज्ञान, संगीत, कला, बुद्धि और विवेक की अधिष्ठात्री देवी हैं। विद्यार्थी, लेखक, कलाकार और संगीतकार अपने उपकरणों (कलम, वाद्य यंत्र, किताबें) को मां के चरणों में रखकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

3. बसंत पंचमी पूजा विधि (How to Worship)

सरस्वती पूजा के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है। यहाँ सरल पूजा विधि दी गई है:

  • पीले वस्त्र पहनें: सुबह स्नान के बाद पीले या सफेद रंग के कपड़े पहनें।

  • मूर्ति स्थापना: उत्तर-पूर्व दिशा में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें।

  • पीले फूल और फल: माता को पीले गेंदे के फूल, बेर, गाजर और पीली बूंदी का भोग लगाएं।

  • मंत्र जाप: एकाग्रता बढ़ाने के लिए इस मंत्र का जाप करें:

    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वत्यै नमः

  • कलम और पुस्तक की पूजा: अपनी पढ़ाई-लिखाई की चीजों की पूजा करें और उस दिन पढ़ाई से विश्राम लेकर मां का ध्यान करें।

4. भारत के विभिन्न राज्यों में बसंत पंचमी का उत्सव

भारत की विविधता इस त्योहार में भी झलकती है:

  • पश्चिम बंगाल: यहाँ 'सरस्वती पूजा' सबसे बड़े उत्सवों में से एक है। पंडाल सजाए जाते हैं और छोटे बच्चों का 'हाते खोड़ी' (लिखने की शुरुआत) संस्कार किया जाता है।

  • पंजाब और हरियाणा: यहाँ लोग पीले रंग की पगड़ी पहनते हैं और आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। घर-घर में 'मीठे चावल' बनाए जाते हैं।

  • बिहार और उत्तर प्रदेश: यहाँ सरस्वती प्रतिमा विसर्जन की परंपरा है और लोग केसरिया भात का आनंद लेते हैं।

  • राजस्थान: लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और मां सरस्वती को केसर का तिलक लगाते हैं।