श्री राम स्तोत्र | Shree Ram Stotram क्या है?

श्री राम स्तोत्र | Shree Ram Stotram एक प्रसिद्ध हिन्दू स्तोत्र है जिसे देवी-देवताओं की उपासना के लिए पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र भक्तों में श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक शांति की भावना उत्पन्न करता है।

श्री राम स्तोत्र | Shree Ram Stotram पढ़ने के लाभ

  • मन को शांति और एकाग्रता प्रदान करता है
  • नियमित पाठ से सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है
  • भक्ति और आध्यात्मिक भाव को मजबूत करता है

श्री राम स्तोत्र | Shree Ram Stotram कब पढ़ना चाहिए?

श्री राम स्तोत्र | Shree Ram Stotram का पाठ प्रातःकाल, संध्या समय या विशेष व्रत, पूजा एवं त्योहारों के अवसर पर किया जा सकता है।

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम्।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥१॥

 

आर्तानामार्तिहन्तारं भीतानां भीतिनाशनम्।
द्विषतां कालदण्डं तं रामचन्द्रं नमाम्यहम् ॥२॥

 

नमः कोदण्डहस्ताय सन्धीकृतशराय च।
खण्डिताखिलदैत्याय रामायाऽऽपन्निवारिणे ॥३॥

 

रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥४॥

 

अग्रतः पृष्ठतश्चैव पार्श्वतश्च महाबलौ।
आकर्णपूर्णधन्वानौ रक्षेतां रामलक्ष्मणौ॥५॥

 

सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा।
गच्छन् ममाग्रतो नित्यं रामः पातु सलक्ष्मणः॥६॥

 

अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात्।
नश्यन्ति सकला रोगास्सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥७॥

 

सत्यं सत्यं पुनस्सत्यमुद्धृत्य भुजमुच्यते।
वेदाच्छास्त्रं परं नास्ति न दैवं केशवात् परम् ॥८॥

 

शरीरे जर्जरीभूते व्याधिग्रस्ते कलेवरे।
औषधं जाह्नवीतोयं वैद्यो नारायणो हरिः॥९॥

 

आलोड्य सर्वशास्त्राणि विचार्य च पुनः पुनः।
इदमेकं सुनिष्पन्नं ध्येयो नारायणो हरिः॥१०॥

 

कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि ॥११॥

 

यदक्षरपदभ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत्।
तत्सर्वं क्षम्यतां देव नारायण नमोऽस्तु ते ॥१२॥

 

विसर्गबिन्दुमात्राणि पदपादाक्षराणि च।
न्यूनानि चातिरिक्तानि क्षमस्व पुरुषोत्तम॥१३॥