मंगल स्तोत्र | Mangal Stotram एक प्रसिद्ध हिन्दू स्तोत्र है जिसे देवी-देवताओं की उपासना के लिए पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र भक्तों में श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक शांति की भावना उत्पन्न करता है।
मंगल स्तोत्र | Mangal Stotram का पाठ प्रातःकाल, संध्या समय या विशेष व्रत, पूजा एवं त्योहारों के अवसर पर किया जा सकता है।
रक्ताम्बरो रक्तवपु: किरीटी, चतुर्मुखो मेघगदो गदाधृक ।
धरासुत: शक्तिधरश्च शूली, सदा मम स्याद वरद: प्रशान्त: ।।1।।
धरणीगर्भसंभूतं विद्युतेजसमप्रभम ।
कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलं प्रणमाम्यहम ।।2।।
ऋणहर्त्रे नमस्तुभ्यं दु:खदारिद्रनाशिने ।
नमामि द्योतमानाय सर्वकल्याणकारिणे ।।3।।
देवदानवगन्धर्वयक्षराक्षसपन्नगा: ।
सुखं यान्ति यतस्तस्मै नमो धरणि सूनवे ।।4।।
यो वक्रगतिमापन्नो नृणां विघ्नं प्रयच्छति ।
पूजित: सुखसौभाग्यं तस्मै क्ष्मासूनवे नम: ।।5।।
प्रसादं कुरु मे नाथ मंगलप्रद मंगल ।
मेषवाहन रुद्रात्मन पुत्रान देहि धनं यश: ।।6।।