कहानी - सूरज भगवान रोज उठते और जग में प्रकाश देने चले जाते । एक दिन भगवान को लगा कि राणा दे सूखती चली जा रही है तो राणा दे से पूछा कि तुम्हारे मन में क्या है । राणा दे बोली- "मेरे मन में खीर खांड के भोजन की इच्छा है ।" भगवान बोले "मांगा भी तो क्या मांगा ये तो हम रोज ही खाते हैं ।" राणा दे बोली " भगवान आप खीर खांड के भोजन जीमते हो, मैं तो खट्टी रब जीमती हूँ।" भगवान बोले "राणा दे तुम झूठ बोलते हो ।" एक जैसा भोजन मेरी माँ हमको देती है । राणा दे बोली सुबह आप मेरी थाली लेना मुझे आपकी थाली देना । दूसरे दिन जीमते समय भगवान ने पानी के गिलास को टक्कर देकर गिरा दिया। माताजी बोली "तुम मत उठो, मैं दूसरा गिलास भर देती हूँ ।" माताजी गये इतने में भगवान ने थालियां बदल ली । राणा दे ने तो जल्दी ही खीर खांड के भोजन कर लिये और सूरज भगवान को खट्टी राब भायी नहीं और थाली पर बैठे रहे। माताजी बोले आज इतनी देर क्यों लगी। भगवान बोले "आज तो खीर खांड खट्टी लग रही है ।" माताजी बोले राणा दे की थाली आपने क्यों ली । भगवान कहने लगे मां अपने घर में आप दो जने और मैं जिसमें भी दो भांत । मैं नियम पालन वाला और मेरे ही घर में ऐसा होता है । तो दुनिया में क्या होता होगा । घर में सब का खाना एक जैसा बनाओ । वहां से वो कुम्हार के गये और बोले "दो पेट की हांडी किस कुम्हार ने बनाई ।" रतन कुम्हार को लगा आज तो भगवान आये है । मांजी तो एक टका देती थी ये दो टका देंगे । और कुम्हार बोला मैंने बनाई । भगवान बोले आज के बाद दो पेट हांडी के बनाये तो तेरे सहस्त्र पेट कर दूंगा । कुम्हार बोला "मेरा तो एक पेट भरना मुश्किल है । सहस्त्र हो गये तो क्या करूंगा ।" मैं अब दो पेट की हांडी नही बनाऊंगा । इस तरह सूरज भगवान ने दुभांत मिटाई ।

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