एक बुढ़िया थी | उसने सभी प्रकार के  व्रत किये  लेकिन पोपी बाई व्रत नहीं किया |  कुछ समय बाद वह बुढ़िया मर गई |  मरने के बाद सबसे पहले भगवान के घर पोपी  बाई का दरवाजा आता है तो  ओपी भाई ने बुढ़िया का रास्ता रोका और कहा - तुमने सभी व्रत किए मेरा व्रत क्यों नहीं किया ? इसलिए मैंने तुम्हारा रास्ता रोका है |  तब बुढ़िया ने कहा कि मैं आपको जानती नहीं इसलिए मैंने आपका व्रत नहीं किया, मैं आपसे क्षमा मांगती हूं |  मुझे अपने व्रत की विधि बताइए | तब ओपी भाई ने कहा कि एक कांसी  की कटोरी, एक खोपरे को काटकर बनी कटोरी राई और तिल से भरी होनी चाहिए, इसमें  श्रद्धा अनुसार गुप्त दान होना चाहिए |  अब बुढ़िया बोली यह सब तो ठीक है पर मैं यह व्रत कैसे करूं मैं तो मर चुकी हूं | पोपी बाई ने बुढ़िया को वापस धरती पर भेज दिया |  बुढ़िया ने वापस धरती पर आकर बड़े धूमधाम से पोपी बाईं  का व्रत किया  थोड़े दिन बाद बुढ़िया का स्वर्गवास हो गया |  भगवान के घर सबसे पहले पॉपी बाई ने द्वार पर दोनों हाथ फैलाकर बुढ़िया को अपनी शरण में ले मोक्ष दिया |  सभी कहानी कहने, सुनने, हुंकारा  भरने वाले को मोक्ष प्राप्त होवे  |