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Jagannnath Ji Ki Aarti
जगन्नाथ जी की आरती

सुर मुनि-पूजित गणनायक की॥

आरती एकदंत, शशिभाल, गजानन, विघ्नविनासक, शुभगुण कानन, शिवसुत, वन्द्यमान-चतुरानन, दु:खविनाशक, सुखदायक की।

आरती ऋद्धि-सिद्धि स्वामी समर्थ अति, विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति, अघ-वन-दहन, अमल अविगत गति, विद्या, विनय-विभव दायक की।

आरती पिङ्गलनयन, विशाल शुंडधर, धूम्रवर्ण, शुचि वज्रांकुश-कर, लम्बोदर, बाधा-विपत्ति-हर, सुर-वन्दित सब बिधिलायक की॥

आरती